उत्तर प्रदेश की सियासत में चुनाव से पहले रंगों की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। समाजवादी पार्टी ने अपनी समाजवादी छात्रसभा की टी-शर्ट के रंग में बदलाव किया है। अब लाल रंग के साथ नीला रंग भी दिखाई देगा और टी-शर्ट पर साइकिल के साथ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर नजर आएगी। इसी बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसे समाजवादी पार्टी की दलित मतदाताओं तक पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी की रणनीति का वास्तविक चुनावी असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती जा रही हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी की ओर से किया गया एक बदलाव सियासी चर्चा का विषय बन गया है।
समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं की टी-शर्ट अब नए रंग में दिखाई देगी। पहले जहां लाल रंग समाजवादी पार्टी की पहचान का अहम हिस्सा रहा है, वहीं अब नीला रंग भी पार्टी के छात्र संगठन की पहचान में शामिल होता नजर आएगा।
खास बात यह है कि नई टी-शर्ट पर समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह साइकिल दिखाई दे रहा है और उसके साथ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भी शामिल की गई है।
यही बदलाव राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में नीले रंग को लंबे समय से दलित राजनीति और बहुजन राजनीति से जोड़कर देखा जाता रहा है। बहुजन समाज पार्टी की राजनीति में भी नीले रंग का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में समाजवादी छात्रसभा की टी-शर्ट में नीले रंग को शामिल किए जाने के बाद इस कदम को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है।
हाल ही में अखिलेश यादव भी नीले रंग का गमछा पहने नजर आए थे। इसके बाद अब छात्रसभा की टी-शर्ट में नीला रंग और बाबा साहब की तस्वीर दिखाई देना चर्चा को और बढ़ा रहा है।
क्या दलित वोटों पर है नजर?
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। राज्य में दलित आबादी का हिस्सा करीब 21 प्रतिशत बताया जाता है। ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल इस बड़े सामाजिक समूह को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 37 सीटें जीतकर अपने प्रदर्शन से सियासी समीकरणों को प्रभावित किया था। अब आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी अलग-अलग सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश करती नजर आ रही है।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी युवा और नए मतदाताओं के बीच अपनी सामाजिक पहुंच मजबूत करना चाहती है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि केवल रंग और प्रतीकों में बदलाव से किसी खास वर्ग का समर्थन पार्टी के पक्ष में पूरी तरह स्थानांतरित हो जाएगा।
PDA को लेकर भी चर्चा में रहे अखिलेश इससे पहले अखिलेश यादव अपने PDA के नए अर्थ को लेकर भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने PDA को Protest, Demonstration और Activist के संदर्भ में परिभाषित किया था।
अखिलेश यादव ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए बीजेपी पर भी निशाना साधा था। उन्होंने सामाजिक न्याय, आरक्षण और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के योगदान जैसे मुद्दों को लेकर अपनी राजनीतिक लाइन स्पष्ट की है। अखिलेश यादव पहले भी बीजेपी पर आरक्षण को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर बीजेपी लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की राजनीति पर पलटवार करती रही है।

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