दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इस हादसे में 7 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद मामले की जांच में बिल्डिंग मालिक हरिराम पुलिस के रडार पर था। हादसे के बाद से ही हरिराम की तलाश की जा रही थी। दिल्ली पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली-NCR के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में छापेमारी की। आखिरकार पुलिस को कामयाबी मिली और हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस अब हरिराम को भिवाड़ी से दिल्ली लेकर आ रही है। दिल्ली पहुंचने के बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस अदालत से उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है। जांच एजेंसियां यह जानना चाहती हैं कि हादसे के बाद हरिराम दिल्ली से क्यों गायब हुआ और उसके फरार होने की परिस्थितियां क्या थीं।
पुलिस के सामने यह भी जांच का विषय है कि क्या हरिराम के पास इमारत से जुड़े ऐसे दस्तावेज या जानकारी थी, जो जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की पूछताछ और जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
हरिराम की तलाश के लिए दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी टीम तैयार की थी। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए 10 अलग-अलग टीमें बनाई थीं। इन टीमों में स्थानीय पुलिस, स्पेशल स्टाफ और ऑपरेशन यूनिट के पुलिसकर्मी शामिल थे। इन टीमों की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही थी।
हरिराम की तलाश में पुलिस ने दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम और हरियाणा के कई इलाकों में दबिश दी। उत्तर प्रदेश में भी उसके संभावित ठिकानों की जांच की गई। पुलिस ने उसके करीबियों और रिश्तेदारों से जुड़े संभावित ठिकानों पर भी छापेमारी की, लेकिन शुरुआती प्रयासों में उसका कोई सुराग नहीं मिला।
जांच के दौरान पुलिस को आशंका थी कि हरिराम दिल्ली-NCR में ही कहीं छिपा हो सकता है। इसी आधार पर अलग-अलग स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई। बाद में उसकी लोकेशन राजस्थान के भिवाड़ी तक पहुंची और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे वहां से हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने हरिराम के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर यानी LOC भी जारी किया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वह देश से बाहर न जा सके और जांच एजेंसियों की पकड़ से बच न पाए।
दूसरी ओर, सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने दिल्ली में पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर संजीव खिरवार के अनुसार, यह इमारत 1970 के दशक की थी। उन्होंने बताया कि इमारत को पहले कभी नोटिस नहीं दिया गया था और न ही इसे सील किया गया था। उनके मुताबिक, इस इमारत के संबंध में पहले कोई शिकायत भी प्राप्त नहीं हुई थी।
हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता सामने आई। MCD कमिश्नर के अनुसार, हादसे के बाद बगल की इमारत भी कमजोर हो गई थी, जिसे रातभर में मजबूत करने का काम किया गया। उन्होंने बताया कि अगले एक-दो दिनों में उसे योजनाबद्ध तरीके से ध्वस्त करने की कार्रवाई की जानी थी।
इस घटना को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है। ऐसे में अब मामले की जांच केवल बिल्डिंग मालिक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हादसे के कारणों, इमारत की स्थिति और संबंधित जिम्मेदारियों को लेकर भी सवालों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर राजधानी में जर्जर और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। सात लोगों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस हादसे की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या समय रहते खतरे को पहचाना जा सकता था। पुलिस की जांच और कोर्ट की कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

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