गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन मंगलवार को उस वक्त चर्चा में आ गया, जब प्रदर्शन के दौरान पुलिस चौकी प्रभारी का छात्रों पर नाराजगी जताते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में चौकी प्रभारी अविरल मिश्रा छात्रों से सख्त लहजे में बात करते और ज्यादा पुलिस बल बुलाने की चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। वहीं, गोरखपुर पुलिस का कहना है कि धरने पर बैठे कुछ निष्कासित छात्र उग्र हो गए थे और उन्होंने प्रॉक्टर के साथ अभद्रता, धक्का-मुक्की और मारपीट का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक, मौके पर मौजूद जवानों ने हस्तक्षेप कर प्रॉक्टर को सुरक्षित बाहर निकाला और स्थिति को नियंत्रित किया। इस पूरे घटनाक्रम की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन अब पुलिस के वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में विश्वविद्यालय पुलिस चौकी प्रभारी अविरल मिश्रा छात्रों पर नाराजगी जताते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वह आंदोलन के तरीके पर सवाल उठाते हुए छात्रों को सख्त लहजे में चेतावनी देते नजर आते हैं।
वायरल वीडियो में चौकी प्रभारी कहते सुनाई दे रहे हैं कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं है और छात्रों के कॉलर पकड़ने तक की स्थिति सामने आ रही है। इसी दौरान वह ज्यादा पुलिस बल बुलाने की बात भी कहते हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और विश्वविद्यालय परिसर का मामला चर्चा में आ गया है।
हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद गोरखपुर पुलिस ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा है। पुलिस के मुताबिक, 8 सितंबर 2026 को गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठे निष्कासित छात्रों से प्रॉक्टर और अन्य अधिकारियों की बातचीत चल रही थी। इसी दौरान कुछ छात्र कथित तौर पर उग्र हो गए। पुलिस का आरोप है कि छात्रों ने प्रॉक्टर के साथ अभद्रता की और धक्का-मुक्की तथा मारपीट का प्रयास किया।
पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और प्रॉक्टर को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और विश्वविद्यालय परिसर में माहौल शांत कराया। पुलिस ने कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल उठता है कि आखिर विश्वविद्यालय परिसर में यह पूरा विवाद शुरू कैसे हुआ?
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार दोपहर प्रशासनिक भवन के नीचे छात्र नेता सतीश प्रजापति और उज्जवल सिंह अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इसी दौरान असिस्टेंट प्रॉक्टर वेद प्रकाश राय वहां छात्र नेताओं से बातचीत करने पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच मांगों को लेकर बातचीत शुरू हुई, लेकिन कुछ समय बाद माहौल बिगड़ गया।
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, बातचीत के दौरान बहस बढ़ी और फिर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। वीडियो में कुछ छात्र नेताओं के नीचे गिरने के दृश्य भी दिखाई देने की बात सामने आई है। स्थिति बिगड़ने पर असिस्टेंट प्रॉक्टर छात्रों के बीच घिर गए। इसके बाद विश्वविद्यालय के गार्ड उन्हें वहां से निकालकर प्रशासनिक भवन स्थित उनके कार्यालय तक ले गए।
घटना के बाद छात्र नेता फिर से अनशन पर बैठ गए। उनका कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं करता, आंदोलन जारी रहेगा।
दरअसल, यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। छात्र नेताओं के मुताबिक, 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने आंदोलन चल रहा है। शुरुआत धरने से हुई थी, लेकिन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए 5 सितंबर से इसे भूख हड़ताल में बदल दिया गया।
छात्र नेताओं की सबसे प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्रों की बहाली शामिल है। उनका आरोप है कि छात्र समस्याओं को उठाने और अपनी बात रखने वाले छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई। छात्र नेता इस कार्रवाई को वापस लेने और निष्कासित छात्रों को दोबारा पढ़ाई का मौका देने की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। छात्र नेताओं का कहना है कि लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं, जबकि छात्रों से छात्रसंघ शुल्क लिया जा रहा है।
आंदोलन में हॉस्टल की सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्रों ने मेस और दूसरी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने की मांग की है। साथ ही PM-उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय में हो रहे कार्यों में पारदर्शिता की मांग भी की गई है।
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय की परीक्षा एजेंसी की व्यवस्था और डिग्री-अंकपत्र के नाम पर कथित वसूली के आरोपों की जांच की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन, प्रॉक्टर से विवाद और पुलिस चौकी प्रभारी का वायरल वीडियो—तीनों ने मामले को गरमा दिया है। एक तरफ छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं, वहीं पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की बात कर रही है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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