हिंदी दिवस के मौके पर मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी, मातृभाषा और वंदे मातरम् को लेकर बड़ा बयान दिया है। नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस 2026 और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि गुलामी के दौर में भारतीय चेतना को जगाने का प्रयास था। वहीं मातृभाषा के महत्व पर उन्होंने कहा कि कोई बच्चा अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही भारत को सही मायने में समझ सकता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की अपील करते हुए भाषा के नाम पर विवाद पैदा करने से बचने की बात भी कही।
मुंबई: हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाषा, संस्कृति, राष्ट्र चेतना और वंदे मातरम् को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। सोमवार, 14 सितंबर को नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस 2026 एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने हिंदी को देश की भाषाई एकता और राष्ट्रीय चेतना की वाहक बताया। अपने संबोधन में उन्होंने मातृभाषा के महत्व पर जोर दिया और कहा कि बच्चा अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही भारत को समझ सकता है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में वंदे मातरम् का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को केवल एक गीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, गुलामी के दौर में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसके माध्यम से भारतीय चेतना को जगाने का प्रयास किया था।
'वंदे मातरम् ने सोई हुई चेतना को झकझोरा'
गृह मंत्री ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी रचना के जरिए उस समय भारत की सोई हुई चेतना को झकझोरने का काम किया। उन्होंने कहा कि आनंद मठ में लिखा गया यह गीत देखते ही देखते पूरे देश में आजादी की उद्घोषणा बन गया।
अमित शाह के मुताबिक, वंदे मातरम् ने केवल लोगों के भीतर स्वतंत्रता हासिल करने की इच्छा और भावना को मजबूत नहीं किया, बल्कि इसके साथ भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखने का भी काम किया।
उन्होंने आगे कहा कि समय के साथ वंदे मातरम् के स्वरूप को लेकर भी बदलाव हुए और इसे पूर्ण स्वरूप में स्वीकार करने में देश को लंबा समय लगा। अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में वंदे मातरम् को फिर से गौरव के साथ सरकारी समारोहों में शामिल किया गया।
मातृभाषा को लेकर अमित शाह ने क्या कहा?
अपने संबोधन में अमित शाह ने मातृभाषा के महत्व को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के लिए अपनी मातृभाषा केवल बातचीत का माध्यम नहीं होती, बल्कि उसके भावनात्मक और सांस्कृतिक विकास का आधार भी होती है।
उन्होंने कहा कि बच्चा मां का दुलार, बहन का प्यार और अपनी जमीन से जुड़ाव अपनी मातृभाषा के जरिए बेहतर तरीके से समझ सकता है। उनके मुताबिक भाषा के माध्यम से ही व्यक्ति अपनी भूमि, परंपरा, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ता है।
अमित शाह ने कहा कि बच्चा अपनी मातृभाषा सीखे बिना पूरी तरह विकसित व्यक्ति नहीं बन सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विविध भाषाएं देश की सांस्कृतिक ताकत हैं और किसी एक भाषा को दूसरी के खिलाफ खड़ा करना उचित नहीं है।
'विदेशी भाषा में भारत समझेगा तो गलती कर देगा'
भाषा विवाद को लेकर भी अमित शाह ने स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग भाषाओं के बीच विवाद खड़ा करना चाहते हैं, उनसे वह कहना चाहते हैं कि सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चा अपनी मातृभाषा में ही भारत को समझ सकता है। उनके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति विदेशी भाषा के माध्यम से भारत को समझने की कोशिश करेगा तो भारत को समझने में गलती हो सकती है।
इस दौरान उन्होंने संविधान निर्माताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि सोच-समझकर हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने राजभाषा विभाग की उपलब्धियों और नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर मातृभाषा के महत्व का भी जिक्र किया।
रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का भी किया उल्लेख
अमित शाह ने अपने संबोधन में कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति और साहित्य की तुलना एक विकसित शतदल कमल से की, जिसकी प्रत्येक पंखुड़ी देश की अलग-अलग प्रादेशिक भाषाओं का प्रतिनिधित्व करती है।
उनका कहना था कि यदि कमल की किसी एक पंखुड़ी को नष्ट कर दिया जाए तो पूरे कमल की सुंदरता और शोभा प्रभावित होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत की सभी भाषाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन की आवश्यकता पर जोर दिया।
भाषा से जुड़े विवाद पर दिया एकजुटता का संदेश
हिंदी दिवस के इस कार्यक्रम में अमित शाह के संबोधन का केंद्र केवल हिंदी नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भारतीय भाषाओं की व्यापक भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को अलग रखते हुए भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
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