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राम मंदिर चढ़ावा कथित चोरी मामला: जांच हुई तेज, 70 लोगों को नोटिस, ट्रस्ट और बैंकिंग सिस्टम भी जांच के घेरे में


अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और गबन के मामले की जांच अब तेज हो गई है। विशेष जांच दल (SIT) और पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 70 लोगों को नोटिस जारी किया है। इन सभी को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जांच एजेंसियां पहले से गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही हैं, वहीं अब ट्रस्ट से जुड़े विभिन्न विभागों, बैंकिंग व्यवस्था और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को जिला कारागार में बंद आरोपी अविनाश शुक्ला से करीब दो घंटे तक विस्तृत पूछताछ की गई। जांच अधिकारियों ने उससे कथित रूप से बरामद नकदी, दस्तावेजों और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल किए। अब टिन्नू यादव समेत अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसियों का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ना और यह पता लगाना है कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

पुलिस द्वारा जारी किए गए नोटिस उन लोगों को भेजे गए हैं जो किसी न किसी रूप में राम मंदिर में चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा, निगरानी, कर्मचारियों की नियुक्ति, नकदी प्रबंधन या बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है और किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

जांच के दौरान अविनाश शुक्ला के घर से लाखों रुपये नकद और कुछ संदिग्ध दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई थी। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह धनराशि कहां से आई, उसका स्रोत क्या था और उसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जाना था। बरामद दस्तावेजों का भी गहन परीक्षण किया जा रहा है ताकि किसी संभावित वित्तीय लेनदेन या कथित गबन के संबंध में स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

सूत्रों के मुताबिक, अविनाश शुक्ला अयोध्या के कौशलपुरी क्षेत्र में रहता था, जहां अन्य आरोपी अनुकल्प और लवकुश का भी निवास बताया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि अविनाश ने अपने भाई के योग सेंटर में निवेश किया था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं कथित तौर पर चढ़ावे से जुड़े धन का उपयोग निजी निवेश या अन्य गतिविधियों में तो नहीं किया गया। हालांकि, इस संबंध में अभी जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है।

इस पूरे मामले में बैंकिंग व्यवस्था भी जांच एजेंसियों के रडार पर है। राम मंदिर में प्राप्त चढ़ावे की नकदी के प्रबंधन की जिम्मेदारी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पास थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकदी के संग्रह, जमा और निगरानी की प्रक्रिया में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई। शुरुआती जांच में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर उनसे पूछताछ की जा सकती है।

जांच एजेंसियां केवल बैंकिंग प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, कर्मचारियों की नियुक्ति और पूरे प्रबंधन तंत्र का भी परीक्षण कर रही हैं। पुलिस ट्रस्ट से प्राप्त रिकॉर्ड और जांच के दौरान मिले दस्तावेजों का मिलान कर रही है ताकि घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

सूत्रों के अनुसार, पहले जिन आठ आरोपियों से पूछताछ की जा चुकी है, उनके बयानों की दोबारा समीक्षा की जा रही है। यदि जांच में आवश्यकता महसूस हुई तो अदालत से दोबारा पूछताछ की अनुमति भी मांगी जा सकती है। इसके अलावा मामले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यदि कथित अनियमितताएं हुई हैं तो वे किस स्तर पर हुईं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। पुलिस का कहना है कि सभी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग जानकारी और संबंधित लोगों के बयानों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष या दोष सिद्ध नहीं हुआ है। जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


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