उत्तर प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने अचानक अपना रौद्र रूप दिखाया है। पिछले करीब 48 घंटों से लगातार हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से नुकसान की तस्वीरें सामने आ रही हैं। राहत आयुक्त की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अतिवृष्टि और आंधी-तूफान से 15 लोगों की जनहानि, 5 लोगों के घायल होने और 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।
बारिश का असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों और जर्जर ढांचों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। कई जगह दीवारें और छतें भरभराकर गिर गईं, जबकि तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। लखीमपुर खीरी में कच्चे मकान की दीवार गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की घटना ने लोगों को झकझोर दिया। अलग-अलग जिलों में बारिश से जुड़े हादसों में भी लोगों की जान गई है।
63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
बारिश की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। राहत आयुक्त के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। कई जिलों में बारिश सामान्य स्तर से कई गुना अधिक रही, जिसके कारण निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ गई।
लखनऊ में भी बारिश का खासा असर देखने को मिला। तेज बारिश और हवाओं के बीच पुराने शहर के हुसैनाबाद स्थित ऐतिहासिक गेट का एक हिस्सा गिर गया। शहर के कई इलाकों में जलभराव से लोगों को परेशानी हुई। वहीं उन्नाव के पास गंगा एक्सप्रेसवे पर भी पानी भरने की खबर सामने आई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ
कई जिलों में मकानों को नुकसान
बारिश और आंधी से मकानों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं प्रदेश के कई हिस्सों में दर्ज हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हरदोई में 14, बांदा में 32, जालौन में 21, पीलीभीत और औरैया में 7-7 तथा बहराइच और सुल्तानपुर में 5-5 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी कच्चे और जर्जर मकानों को नुकसान पहुंचा है।
कुछ घटनाओं में परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। लखीमपुर खीरी के रहमतपुर गांव में कच्ची दीवार गिरने से पति-पत्नी और उनके छह वर्षीय बेटे की मौत हुई। वहीं अन्य जिलों में दीवार, छप्पर और पेड़ गिरने से भी जनहानि की सूचना मिली है। इन घटनाओं ने ग्रामीण और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
मौसम विभाग ने फिर जारी किया अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बने डिप्रेशन के प्रभाव से उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का दौर बना हुआ है। 26 सितंबर को उत्तरी और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई थी।
IMD के 26 सितंबर के अपडेट में पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए 26 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश और 27 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए 26 सितंबर को अत्यंत भारी और 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। साथ ही गरज-चमक और तेज हवाओं की भी संभावना जताई गई।
ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने और पेड़ों या जर्जर इमारतों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी गई है।
अयोध्या समेत कई इलाकों में असर
भारी बारिश और तेज हवाओं का असर धार्मिक नगरी अयोध्या में भी देखने को मिला। राम पथ, राम मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और सरयू क्षेत्र में आवागमन प्रभावित होने की सूचना है। बारिश के बीच श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
उधर, कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर भी चेतावनी स्तर के करीब पहुंचने की सूचना है। ऐसे में नदी और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की निगरानी और सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
लखनऊ में हेल्पलाइन नंबर जारी
बारिश और जलभराव से परेशान लोगों की मदद के लिए लखनऊ नगर निगम ने कंट्रोल रूम की हेल्पलाइन जारी की है। नागरिक टोल-फ्री नंबर 1533 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा 9219902911, 9219902912, 9219902913 और 9219902914 पर भी शिकायत की जा सकती है।
वहीं प्रदेश स्तर पर आपदा संबंधी सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करने की जानकारी भी दी गई है।
प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश
लगातार बारिश और उससे पैदा हुए हालात को देखते हुए प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य तेज रखने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित जिलों के अधिकारियों को सतर्क रहने और प्रभावित क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए उत्तर प्रदेश के लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर निचले इलाकों, नदी किनारे और जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए। बारिश ने जिस तरह पिछले दो दिनों में कई जिलों को प्रभावित किया है, उससे साफ है कि अगले कुछ घंटों में भी स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात जैसी समस्याएं बनी रह सकती हैं।


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